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रक्त संचार प्रणाली क्या है | Blood Circulatory System

मनुष्य तथा उच्च जंतुओं में फंसे हुए पदार्थों तथा वातावरण से ली गई ऑक्सीजन को समस्त कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए एक तंत्र पाया जाता है जिसे परिसंचरण तंत
रक्त परिसंचरण तंत्र

परिसंचरण का अर्थ

मनुष्य तथा उच्च जंतुओं में फंसे हुए पदार्थों तथा वातावरण से ली गई ऑक्सीजन को समस्त कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए एक तंत्र पाया जाता है, जिसे परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) कहते हैं। इस परिसंचरण तंत्र में रक्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । रक्त एक तरह का संयोजी उत्तक (Connective Tissue) है, यही तरल रक्त पदार्थों के परिवहन या परिसंचरण हेतु एक माध्यम का कार्य करता है इसलिए परिसंचरण तंत्र को रक्त परिसंचरण तंत्र (Blood Circulatory System) भी कहते हैं। 

रक्त परिसंचरण तंत्र की खोज

रक्त परिसंचरण तंत्र की खोज 1628 ईस्वी में विलियम हार्वे (Villiam Harvey) ने की थी। मनुष्य तथा सभी कशेरुकी जंतुओं (Vertibrates) में बंद प्रकार का रक्त परिसंचरण तंत्र पाया जाता है, जिसमें रक्त छोटी-बड़ी नलीकाओ में प्रवाहित होता है ।

रक्त परिसंचरण तंत्र

रक्त परिसंचरण तंत्र के कार्य

रक्त परिसंचरण तंत्र के कुछ महत्वपूर्ण कार्य इस प्रकार से है -

  1. यह पोषक पदार्थों जैसे - ग्लूकोस, वसीय अम्ल, विटामिन आदि का अवशोषण कर केंद्र से शरीर के विभिन्न भागों तक परिवहन करता है।
  2. यह नाइट्रोजन अपशिष्ट पदार्थों जैसे - अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल आदि का शरीर के विभिन्न भागों से उत्सर्जित अंगों (Excreatory Orgens) तक परिवहन करता है।
  3. यह हार्मोन का अंतः स्रावी ग्रंथि से विभिन्न अंगों तक परिवहन करता है।
  4. यह फेफड़ों (Lungs) से शरीर की कोशिकाओं एवं उतको तक ऑक्सीजन का परिवहन करता है।

परिसंचरण तंत्र के प्रकार

रक्त परिसंचरण तंत्र को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है

  • खुला परिसंचरण तंत्र (Open Circulatory System)
  • बंद परिसंचरण तंत्र (Closed Circulatory System)

खुला परिसंचरण तंत्र क्या है
इस प्रकार के परिसंचरण तंत्र में रुधिर कुछ समय के लिए रुधिर नलिकाओ (Blood Capillaries) मैं रहता है, तथा अंत में रुधिर नलिकाओ से खुले स्थान में आ जाता है। इस प्रकार का रुधिर परिसंचरण तंत्र तिलचट्टा, प्रॉन, किट , मकड़ी आदि में पाया जाता है। इस प्रकार के रुधिर परिसंचरण तंत्र (Blood Circulatory System) में रुधिर कम दाब तथा कम गति से बहता है। इस प्रकार के रुधिर परिसंचरण तंत्र में रुधिर परिसंचरण चक्र (Blood Circulatory Cycle) कम समय में पूर्ण हो जाता है, जैसे - तिलचट्टे मैं रुधिर परिसंचरण चक्र केवल 5 से 6 मिनट में पूर्ण हो जाता है।

बंद परिसंचरण तंत्र क्या है
इस प्रकार के परिसंचरण तंत्र में रक्त बंद नलिकाओं में बहता है। इनमें रुधिर अधिक दाब एवं अधिक गति से बहता है, इसमें पदार्थों का आदान-प्रदान ऊतक द्रव्य (Tissue Fluid) द्वारा होता है। इस प्रकार का परिसंचरण तंत्र सभी कशेरुकी (Vertibrates) में पाया जाता है।

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